खेत बचाओ अभियान कॉन्फ्रेंस: शिवराज सिंह चौहान की बड़ी पहल, कृषि सुधार पर जोर

Sat 30-May-2026,03:00 PM IST +05:30

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खेत बचाओ अभियान कॉन्फ्रेंस: शिवराज सिंह चौहान की बड़ी पहल, कृषि सुधार पर जोर Agriculture Conference
  • खेत बचाओ अभियान को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करने की योजना. 

  • संतुलित उर्वरक उपयोग और प्राकृतिक खेती पर विशेष जोर. 

  • किसानों की आय बढ़ाने और कृषि सुधार पर सरकार का फोकस. 

Delhi / Delhi :

Delhi / नई दिल्ली स्थित पूसा परिसर में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय खरीफ कॉन्फ्रेंस भारतीय कृषि के लिए एक ऐतिहासिक और निर्णायक मंच के रूप में सामने आया। इस सम्मेलन में देश के 22 राज्यों के कृषि मंत्री पहली बार एक साथ शामिल हुए और किसानों की आय बढ़ाने, कृषि उत्पादन को स्थिर और टिकाऊ बनाने तथा कृषि व्यवस्था को आधुनिक दिशा देने पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया ।

यह कॉन्फ्रेंस केवल एक औपचारिक बैठक नहीं थी, बल्कि यह कृषि क्षेत्र के भविष्य को लेकर एक साझा राष्ट्रीय संकल्प का प्रतीक बन गया। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने पूरे कार्यक्रम की अध्यक्षता की और इसे कृषि सुधारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि कृषि केवल उत्पादन का विषय नहीं है, बल्कि यह मिट्टी, पर्यावरण, किसान की आय और देश के भविष्य से जुड़ा एक व्यापक विषय है ।

सम्मेलन में सबसे अधिक जोर ‘खेत बचाओ अभियान’ पर दिया गया, जिसे केवल एक कार्यक्रम नहीं बल्कि एक राष्ट्रीय आंदोलन के रूप में विकसित करने की बात कही गई। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य संतुलित उर्वरक उपयोग, मिट्टी की सेहत को सुधारना और किसानों को वैज्ञानिक खेती की ओर प्रेरित करना है। इसके साथ ही प्राकृतिक खेती और जैविक विकल्पों को बढ़ावा देने पर भी विशेष ध्यान दिया गया ।

बैठक में यह भी तय हुआ कि किसानों को मौसम आधारित और क्षेत्रीय सलाह देने के लिए एक मजबूत तंत्र विकसित किया जाएगा। बदलते जलवायु पैटर्न को देखते हुए यह जरूरी है कि किसानों को समय पर यह बताया जाए कि कौन-सी फसल उपयुक्त होगी और किस प्रकार जोखिम को कम किया जा सकता है। इससे खेती अधिक सुरक्षित और लाभकारी बन सकेगी ।

इस कॉन्फ्रेंस की एक खास बात यह रही कि कृषि मंत्रियों ने न केवल नीतिगत स्तर पर समर्थन दिया, बल्कि अपने व्यक्तिगत स्तर पर भी प्राकृतिक खेती अपनाने का संकल्प लिया। यह निर्णय इसलिए महत्वपूर्ण माना गया क्योंकि इससे किसानों के बीच विश्वास और जागरूकता दोनों बढ़ेगी। जब नीति निर्माता स्वयं प्रयोग करेंगे, तो उसका प्रभाव जमीनी स्तर पर अधिक मजबूत होगा ।

सम्मेलन में कृषि अनुसंधान संस्थानों, कृषि विज्ञान केंद्रों और राज्य कृषि विभागों की भूमिका को भी मजबूत करने पर जोर दिया गया। देशभर में फैले KVK नेटवर्क को किसानों तक सीधे तकनीकी जानकारी पहुंचाने की जिम्मेदारी दी गई है। इससे कृषि योजनाओं और वैज्ञानिक सलाह का सीधा लाभ किसानों तक पहुंच सकेगा ।

इसके अलावा दलहन और तिलहन में आत्मनिर्भरता, फसल विविधीकरण, जल संरक्षण और मृदा स्वास्थ्य सुधार जैसे विषयों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। सरकार का लक्ष्य है कि कृषि को केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित न रखकर इसे एक संतुलित और दीर्घकालिक विकास मॉडल के रूप में आगे बढ़ाया जाए ।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘विकसित भारत’ के विजन के अनुरूप इस सम्मेलन में यह स्पष्ट किया गया कि कृषि क्षेत्र को भी आत्मनिर्भर और आधुनिक बनाना आवश्यक है। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय और साझा जिम्मेदारी को जरूरी माना गया ।

सम्मेलन के अंत में यह संदेश उभरकर सामने आया कि “खेत बचाओ” केवल नारा नहीं, बल्कि भविष्य की जरूरत है। यदि मिट्टी सुरक्षित रहेगी, तो किसान मजबूत होगा और जब किसान मजबूत होगा, तो देश भी आत्मनिर्भर बनेगा। यह कॉन्फ्रेंस भारतीय कृषि को नई दिशा देने वाला एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुआ, जिसमें विचार से आगे बढ़कर क्रियान्वयन की मजबूत नींव रखी गई ।